मंगलवार, 6 सितंबर 2011

बुरा क्यूँ है...


शाम यूँ ही ढल जाना बुरा क्यूँ है.?
उसको याद न आना बुरा क्यूँ है ?

बेलौस मरासिम न हों न सही...
फ़र्ज़ ही को निभाना बुरा क्यूँ है ?

अक्स के असरार आसेबी तो क्या?
सच सब को दिखलाना बुरा क्यूँ है ?

समंदर साहिलों पे आकर सोचे तो
खुद ही में डूबते जाना बुरा क्यूँ है ?

सरगोशियाँ अफ़वाह न बन जाए कहीं
खुल के साथ निभाना बुरा क्यूँ है...?




"बेलौस" = बिना स्वार्थ के
"मरासिम"= रिश्ते
"सरगोशियाँ"= कानाफूसी
"अक्स" = प्रतिबिम्ब
"असरार" - रहस्य
"आसेबी"= डरावना

5 टिप्‍पणियां:

  1. कल 26/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. Behtareen....naye shabd padhne aur jaanne mile...

    dhanyavaad...

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  3. समंदर साहिलों पे आकर सोचे तो
    खुद ही में डूबते जाना बुरा क्यूँ है ?

    सरगोशियाँ अफ़वाह न बन जाए कहीं
    खुल के साथ निभाना बुरा क्यूँ है...?

    वाह ...बहुत खूब।

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