गुरुवार, 13 जून 2013

मैं सच्चा के तू सच्चा है

मैं सच्चा के तू सच्चा है
इन बातों में क्या रक्खा है

कौन उठाए सच का बोझा
झूठों का भी घर पक्का है

अपनी अपनी सच की सूरत
क्या जाने अब क्या सच्चा है

जीत हार सब झूठी बातें
... खेल खेल में अब सट्टा है

हिम-आलय की बर्फ़ खो गई
अब मौसम हक्का बक्का है

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह रचना कल शनिवार (15 -06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  2. हिम-आलय की बर्फ़ खो गई
    अब मौसम हक्का बक्का है

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